Tuesday, 23 May 2017

मस्सों को सिर्फ 24 घंटे में दूर करते हैं केले के छिलके!


आज के समय में लोग तरह तरह के त्वचा रोगों से घिरे हुए हैं। जिसके से एक त्वचा पर मस्सों की समस्या भी है। कुछ लोगों को गंभीर मस्से होते हैं तो कुछ लोगों को हल्के मस्से होते हैं।

मस्से त्वचा पर एक उपज की तरह होते हैं, और सुसाध्य समझे जाते हैं। यानि कि वे कैंसरयुक्त नहीं होते। इसके बावजूद इनसे ग्रसित कई लोग इन्हें निकालने के लिए आतुर रहते हैं, क्योंकि उनके अनुसार मस्से त्वचा पर अच्छे नहीं दिखते और त्वचा भद्दी और बेकार लगती है।

अपने बदन से इस दाग को हटाने के लिए लोग तरह-तरह से डॉक्टर से परामर्श लेते हैं। कई लोग मस्से हटाने के लिए आॅपरेशन और लेजर ट्रीटमेंट तक करा लेते हैं। आज हम आपको मस्से हटाने के ऐसे अचूक उपाय बता रहे हैं जिससे आपकी समस्या चुटकी बजाते ही सही हो जाएगी। आइए जानते हैं क्या हैं वो उपाय।

केले से करें मस्से दूर
केला पौष्टिक तत्वों से भरपूर फल है। केला स्वास्थ्य लाभ देने के साथ ही मस्सों को भी सफाया करता है।

केले के छिलके में ऑक्सीकरण रोधी तत्व पाए जाते हैं जो मस्सों के लिए काल साबित हुए हैं। केले के छिलके से मस्सों को हटाने के लिए अपने मस्से को केले के छिलके के साथ अच्छी तरह बांध लें। ध्यान रहें इसे इस तरह बांधें कि यह लंबे समय तक टिक सके।

करीब 24 घंटे तक मस्से को बंधा रहने दें। कुछ ही दिनों तक ऐसा करने से मस्सा हमेशा के लिए झड़ जाएगा।
सेब का सिरका भी करता छूमंतर

सेब का सिरका भी मस्सों को छूमंतर करने का एक अचूक उपाय है। बस फर्क यह है कि इससे मस्सा झड़ता नहीं है बल्कि मस्सा धीरे-धीरे जलने लगता है।

दरअसल, सेब के सिरके में मस्से के जीवाणुओं को मारने की शक्ति होती है। साथ ही सेब का सिरका मस्सों को फैलने से भी बचाता है। रोजाना कॉटन या किसी सूती कपड़े में सिरके को रखें और इसे मस्से पर लगाएं। हफ्तेभर तक ऐसा करने से ही मस्से की समस्या से छुटकारा मिलता है।
शहद का करें इस्तेमाल

चाहे बाहरी हो या आंतरिक शहद खूबसूरती बरकरार रखने का सबसे अच्छा तरीका है। त्वचा पर चमक और निखार लाने के साथ ही शहद की मदद से मस्सों से भी छुटकारा पाया जा सकता है।

मस्से पर शहद लगातर इसे डॉक्टर टेप से कवर कर दें। इसे करीब 10 से 12 घंटे तक ऐसे ही ढ़के रहने दें। लगभग 15 दिन तक ऐसा करने से काफी अच्छा रिजल्ट देखने को मिलता है।

Sunday, 21 May 2017

…और सलमान की आंखों से छलक ही गया वो दर्द जिसे उन्होंने बरसों तक छिपा रखा था !


इसमें कोई शक नहीं है कि सलमान खान बॉलीवुड इंडस्ट्री के एक टॉप स्टार हैं.

हालांकि सलमान के बारे में कहा जाता है कि वो काफी मूडी और सख्त मिजाज के इंसान हैं बावजूद इसके उन्हें एक खुशमिजाज और मस्ती करनेवाले इंसान के तौर पर भी जाना जाता है.

दरअसल सलमान खान बॉलीवुड के उन चंद सितारों में शुमार हैं जो अपनी निजी जिंदगी की समस्याओं पर बात करना ज्यादा पसंद नहीं करते हैं. लेकिन अपनी आनेवाली फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ के पहले गाने के रिलीज के दौरान सलमान की आंखों से वो दर्द छलक ही गया जिसे उन्होंने बरसों तक छुपाकर रखा था.

सलमान ने अपने दर्द को अपने फैन्स से साझा किया जिसे जानकर हर कोई भावुक हो उठा. दरअसल सलमान ने अपनी उस बीमारी के बारे में बात की जिससे वो सालों से परेशान हैं.

फेसियल डिसऑर्डर से ग्रसित हैं सलमान
अपनी ही फिल्म के एक गाने की रिलीज के मौके पर सलमान अपनी तकलीफ को अपने सीने में छिपा नहीं सके और उन्होंने खुलकर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया.

इस खास मौके पर सलमान ने बताया कि वो एक लंबे समय से भयानक दर्द देनेवाली फेसियल डिसऑर्डर नाम की बीमारी से ग्रसित हैं जिसे मेडिकल टर्म में ट्राईजेमिनल न्यूराल्जिया कहते हैं.

इस फेसियल डिसऑर्डर की वजह से सलमान को कई बार असहनीय दर्द से गुजरना पड़ता है लेकिन निराश होने के बजाय उन्हें इस बीमारी से प्रेरणा मिली है कि वो और अधिक मेहनत करें और पूरी तरह से एक्टिंग पर फोकस करें.

सलमान की मानें तो फेसियल डिसऑर्डर में चेहरे के हिस्सों को छूने से चाकू के वार जितना तेज दर्द होता है और कई बार पेनकिलर भी इस दर्द को कम नहीं कर पाते हैं.

इस फेसियल डिसऑर्डर से पीड़ित सलमान ने बताया कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस दर्द से गुजर रहे हैं. फिल्म का कोई सीन करते हुए आपके शरीर में कुछ टूट जाए, चाहे आपके घुटनों में चोट आ जाए. ऐसे में आप दर्द का बहाना नहीं बना सकते क्योंकि आपको अपने सीन में बेस्ट देना होता है और वैसे भी आपके दर्द से फैन्स को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें बस आपका बेस्ट सीन याद रहता है.

सलमान के मुताबिक इस फेशियल डिसऑर्डर से पीड़ित लोग दर्द के चलते आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी क्योंकि वो इससे लड़ना चाहते थे. इतना ही नहीं सलमान ने उन लोगों को भी हिम्मत रखने की सलाह दी जो छोटे-छोटे हादसों से अपनी जिंदगी खत्म कर लेने की सोचते हैं.

गौरतलब है कि ईद के मौके पर सलमान खान की फिल्म ट्यूबलाइट रिलीज होनेवाली है. लेकिन यहां सलमान के इस फेसियल डिसऑर्डर का दर्द और उनकी हिम्मत से उन तमाम लोगों को सीख लेने की जरूरत है जो अपनी जिंदगी की छोटी-छोटी परेशानियों के आगे घुटने टेक देते हैं.

Thursday, 18 May 2017

व्हाट्सऐप पर आए इस मैसेज को भूल कर भी ना करें क्लिक


अगर आपके किसी दोस्त ने व्हाट्सऐप पर कोई लिंक शेयर किया है जिसमें व्हाट्सऐप के नए अलग-अलग रंगों वाले वर्जन को इंस्टॉल करने की बात की गई है तो इस लिंक पर भूलकर भी क्लिक ना करें।

यह लिंक आपके कंप्यूटर, मोबाइल को बर्बाद कर सकती है। यहां तक की आपके मोबाइल में वायरस भी आ सकते हैं। लिंक कुछ इस प्रकार भेजे जा रहे हैं http://шһатѕарр.com/?colors

दरअसल रेडडिट के एक मेंबर ने व्हाट्सऐप पर शेयर हो रहे इस लिंक को लेकर दावा किया है कि यह वायरस है और इससे आपका फोन खराब हो सकता है। उन्होंने बताया कि यह लिंक व्हाट्सऐप व सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

वायरल हो रही इस लिंक पर क्लिक करने पर व्हाट्सऐप का विभिन्न रंगों वाला वर्जन डाउनलोड करने का दावा किया जाता है और जैसे ही आप इस लिंक पर क्लिक करते हैं तो यह आपको व्हाट्सऐप का नया वर्जन इंस्टॉल करने को कहता है। फिर नए वर्जन को इंस्टॉल करने से पहले आपको इस लिंक को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना का मैसेज मिलता है।

अगर आप ध्यान देंगे तो पाएंगे इस वेबसाइट पर अलग तरीके के फॉन्ट का इस्तेमाल किया गया है। इस लिंक को Cyrillic अलफाबेट में डिजाइन किया गया है। ये वेबसाइट कुछ шһатѕарр.com इस रूप में नजर आती है।

लिंक पर क्लिक करने पर कई बार यूजर्स को अलग-अलग http://blackwhats.site/ जैसे यूआरल पर रिडायरेक्ट किया जाता है। तो आपके लिए यही बेहतर है कि कलरफुल व्हाट्सऐप के टक्कर में ना पड़ें और इस प्रकार के लिंक पर क्लिक ना करें।

Wednesday, 17 May 2017

Youtube वीडियो देखकर खेत में ही बनाई लैब, 10th पास किसान आज मशरूम से कमा रहा लाखों


कुरुक्षेत्र के भौर सैयदां गांव के हरपाल सिंह बाजवा ने मशरूम उत्पादन से शुरू किए बिजनेस में एक कदम आगे बढ़ाते हुए स्पॉन मेकिंग (मशरूम का बीज तैयार करने की एक विशेष विधि, जिसमें उसे एक निश्चित तापमान पर रखा जाता है) में महारत हासिल की है।
10वीं पास किसान हरपाल ने 50 हजार से मशरूम उत्पादन शुरू किया और लाखों रुपए कमा रहे हैं। उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से स्पॉन मेकिंग के लिए एक लैब तैयार कर रखी है, जिसमें हर साल 1500 किलो स्पॉन तैयार कर रहे हैं।

किसानों के लिए हैं रोल मॉडल, आगे पढ़िए कैसे तय किया सफर...
- हरपाल सिंह बाजवा बताते हैं कि पहले वे परंपरागत खेती करते थे। वर्ष 1995 में मात्र 50 हजार रुपए से मशरूम उगाना शुरू किया। धीरे-धीरे मुनाफा हुआ तो इस तरफ ध्यान बढ़ा।

- कृषि विज्ञान केंद्र कुरुक्षेत्र और खुंब अनुसंधान निदेशालय सोलन के सहयोग से अत्याधुनिक तकनीक की जानकारी ली और अपनी जमीन पर ही मशरूम के लिए कंपोस्ट बनाना शुरू कर दिया। किसानों ने कंपोस्ट खरीदना शुरू कर दिया तो इसके लिए सोलन से बीज लाना पड़ता था।

- बीज की आवश्यकता बढ़ी तो एक अत्याधुनिक स्पॉन (मशरूम का बीज तैयार करने की एक विशेष विधि, जिसमें ) लैब लगाने का मन बनाया और अपने खेत में ही स्पॉन लैब लगा दी। इसके लिए हरियाणा सरकार के बागवानी विभाग ने सब्सिडी दी और बैंक ने लोन दिया।

- कुल 62 लाख रुपए का लोन लिया। रिश्तेदारों ने रोका कुछ ने तो मदद करने से भी इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने कदम पीछे नहीं हटाए, आज स्थिति ये है कि वे हरियाणा के प्रगतिशील किसानों में से एक है।

- वे मशरूम उत्पादन, कंपोस्ट मेकिंग और स्पॉन प्रोडक्शन से लाखों रुपए कमा रहे हैं।

जिला स्तर से लेकर मुख्यमंत्री और यूनिवर्सिटी ने कर रखा है सम्मानित
- हरपाल सिंह जिला स्तर के साथ-साथ हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला, पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से भी सम्मानित हो चुके हैं।

- इसके साथ-साथ 3 बार हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय और खुंब अनुसंधान निदेशालय सोलन ने भी उन्हें सम्मानित किया है। यू-ट्यूब से देख-देखकर विदेशी तर्ज पर बनवाई लाखों की मशीनें हजारों में
- हरपाल सिंह बाजवा बताते हैं कि उन्होंने इस क्षेत्र में अधिक से अधिक आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया है। अपने यहां कुछ मशीनों को विदेशों की तर्ज पर बनवाया है।

- उन्होंने यू-ट्यूब से मशीनें देख-देखकर लाखों रुपए की मशीनें हजारों रुपए में तैयार करवाई है। कंपोस्ट मिलाने के लिए कंपोस्ट फिलिंग मशीन, कंपोस्ट बैग भरने के लिए कंपोस्ट बैग फिलिंग मशीन अपने यहां ही तैयार कराई है।

अब 30-35 डिग्री में भी उगा सकते हैं मशरूम
- हरपाल सिंह बाजवा बताते हैं कि अमूमन मशरूम सर्दियों में उगाई जाती है, लेकिन स्पॉन मेकिंग लैब में उन्होंने अमेरिका के पेनसिलवेनिया से स्पॉन मंगाकर मशरूम का ऐसा बीज मंगाया है, जिससे अब किसान 30-35 डिग्री में भी मशरूम उगा सकते हैं। इस तकनीक का फायदा उठाने के लिए अधिक से अधिक किसान उनसे संपर्क कर रहे हैं।

ये है स्पान मेकिंग प्रोसेस
- मशरूम का बीज वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जाता है। इन बीजों को बोतल या पॉलिथिन की थैलियों में 250 या 500 ग्राम/बोतल या थैली भरते है।

- थैली के मुंह पर पहले लोहे का छल्ला लगाते हैं फिर उसमें रूई की डाट लगाते हैं। बोतल या थैली को जीवाणुविहीन करने के लिए आटोक्लेव/कुकुर में 22 पौंड दाब/वर्ग इंच पर 2 घंटे रखते है। ठंडा होने पर माध्यम में मशरूम बीज (स्पान) मिलाते हैं।

- यह कार्य जीवाणुविहीन कक्ष में किया जाता है। मशरूम फफूंद की वृद्धि इन दानों पर 15-20 दिनों में हो जाती है और फफूंद के क्वकजाल द्वारा सम्पूर्ण दाने ढक लिए जाते हैं, इसे मशरूम का बीज (मदर स्पान) कहते है। इस प्रकार तैयार बोतलों से बीज दूसरी बोतल में मिलाया जाता है तब इसे प्रथम संतति स्पान कहते हैं।

VIRUS को पसंद है यूजर की ये 8 गलतियां, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे



इन दिनों रेनसमवेयर वायरस ने लोगों में डर पैदा कर दिया है। यदि ये वायरस आपके सिस्टम में आता है तब आपको डाटा बचाने के लिए हैकर्स की डिमांड के मुताबिक पैसा देना होगा। वायरस के डर से देशभर में कई जगह 3 दिन तक ATM भी बंद कर दिए गए हैं। साथ ही, लोगों को वायरस से बचने की सलाह दी जा रही है। सोशल मीडिया फेसबुक और वॉट्सऐप पर भी इससे बचने के टिप्स दिए जा रहे हैं।

- वॉट्सऐप पर एक मैसेज तेजी से फैल रहा है जिसमें बताया गया है कि 'tasksche.exe' नाम की फाइल आपके मेल पर आए तो उसे ओपन नहीं करे।
- इस फाइल पर जैसे ही यूजर क्लिक करेगा उसके सिस्टम में वायरस आ जाएगा और उसके डाटा को तुरंत ब्लॉक कर देगा।

- रेनसमवेयर वायरस उन्हीं सिस्टम पर अटैक कर रहा है जो विंडोज बेस्ड हैं।
- वैसे, आपके PC में वायरस आने के अन्य जरिए भी हो सकते हैं।

- यूजर से डेली वर्क के दौरान कुछ कॉमन मिस्टेक होती हैं, जिन्हें वो लगातार दोहराता भी है।






















Tuesday, 16 May 2017

चीन सड़कों पर अचानक छा गया अंधेरा और होने लगी आग की बारिश !


चीन के शेनयांग शहर में अचानक अंधेरा छा गया और आसमान से आग की बारिश होने लगी। जो लोग उस वक्त सड़कों पर अपनी कारों में मौजूद थे वो इस घटना को देखकर दहशत में पड़ गए।

दिलचस्प बात यह है कि यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हुआ है, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।

चाईना प्लस न्यूज के मुताबिक, आठ सेकेंड का यह वीडियो 11 मई को शेनयांग शहर के डैशबोर्ड कैमरे में कैद हुआ था। चैनल की रिपोर्ट के अनुसार यह घटना बिजली गिरने की है।

शिनयांग शहर में सड़क पर जब बिजली गिरी थी कब सड़क पर काफी ट्रैफिक था। घटना के दौरान गनीमत यह रही कि किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ। वीडियो में साफतौर पर देखा जा सकता है कि सड़क पर सामान्य दिनों की तरह गाड़ियां गुजर रही थीं।

तभी वहां कुछ देर के लिए अंधेरा छा जाता है। इसके बाद दिखता है कि आसमानी बिजली सड़क पर गिरी है। बिजली का गिरना ऐसा दिख रहा जैसे आसमान से आग की बारिश हो रही है

डॉक्‍टर्स समझ रहे थें पेट में हैं 10 बच्‍चे लेकिन ऑपरेशन के बाद निकला कुछ ऐसा जिसे देखकर डॉक्टर्स के भी उड़ गए होश


रूस के मैक्सिको की रहने वाली रहने वाली एक 24 वर्षीय महिला का पेट पिछले 11 महीनों से असाधारण तौर पर बढ़ रहा था।

हद तो तब हो गई जब इस महिला का पेट अपने औसत आकार से कई गुना ज्यादा बढ़ गया. आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इस महिला ने कितनी असहनीय पीड़ा को बर्दास्त किया होगा।

अंग्रेजी वेबसाइट डेलीमेल की खबर के मुताबिक बर्दास्त की हद पार होने के बाद जब यह महिला डॉक्टरों के पास पहुंची तब डॉक्टर्स को लगा कि उसके पेट में लगभग 10 बच्चे पल रहे हैं।

लेकिन जब महिला का आपरेशन किया गया तब डॉक्टर हैरान रह गए। दरअसल महिला का पेट एक बड़े ट्यूमर के कारण इतना निकल आया कि ऐसा लगने लगे उसमें 10 नवजात पल रहे हैं।

डॉक्टर उस वक्त बेहद हैरान हुए जब चेकअप के दौरान उन्हें पता लगा कि पेट में बच्चे नहीं बल्कि वो तो एक बड़ा ट्यूमर है। जिसका वजन 31 किलो से भी ज्यादा था।

आप सोच कर देखिये कि इतने बड़े ट्यूमर को वो महिला कैसे झेलती होगी। महिला का ये ट्यूमर उसके पेट से 95% बड़ा है।

हालांकि डॉक्टरों ने इस ट्यूमर को पूरा जड़ से निकाल दिया है ताकि ट्यूमर से निकले लिक्वेड के जरा भी हिस्से से इस महिला को किसी भी तरह की दिक्कत न हो। डॉक्टरों का मानना है कि ये दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा ट्यूमर है जो सर्जरी के जरिए किसी के पेट से निकाला गया हो।