Sunday, 4 June 2017

कश्मीरी पंडितों के लिए पीएम मोदी का ऐतिहासिक फैसला, विरोधियों में मचा बवाल


नई दिल्ली : राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मंगलवार को भी हुर्रियत नेता नईम खान से पाकिस्तानी और आतंकी संगठनों से फंडिंग मामले पर पूछताछ की.
दंगा फैलाने की एवज में पाकिस्तान और आतंकी संगठनों से फंडिंग के मामले के खुलासे के बाद एनआईए ने फारूक अहमद दार उर्फ बिट्टा कराटे, जावेद अहमद बाबा उर्फ गाजी से भी पूछताछ करी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब मोदी सरकार एक बार फिर जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंटे के नेता फारुख अहमद दार उर्फ बिट्टा कराटे के खिलाफ केस को फिर से खोलने जा रहा है.

मोदी सरकार कश्मीरी पंडितों को न्याय दिलवाएगी
मोदी सरकार ने फैसला लिया है कि “कश्मीरी पंडितों का कसाई” के नाम से कुख्यात बिट्टा कराटे की रिहाई की दुबारा जाँच की जाएगी. मोदी सरकार फारुख अहमद दार उर्फ बिट्टा कराटे के खिलाफ केस को फिर से खोलने जा रही है.

गृह राज्यमंत्री हंसराज अहिर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि “केंद्र सरकार कश्मीरी पंडितों को न्याय दिलवा कर रहेगी और केस को अब दुबारा खोला जायेगा. हम सुप्रीम कोर्ट में बिट्टा की रिहाई के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार की याचिका दायर करेंगे.”

दरअसल साल 2006 में टाडा कोर्ट के जज ने बिट्टा कराटे को जमानत देते वक़्त कहा था कि इसके खिलाफ आरोप तो बहुत गंभीर हैं जिसके लिए इसे फांसी या उम्र कैद होनी चाहिए. लेकिन सबूतों के आभाव में चलते उसे ज़मानत दी जा रही है.

ऐसे में दस साल बाद ही सही पर किसी सरकार ने कश्मीरी पंडितों के दर्द को सुना तो सही. जिससे मोदी सरकार अब बिट्टा कराटे की रिहाई के खिलाफ वापस उसे जेल भिजवाने के लिए कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएगी.

कश्मीरी पंडितों का कसाई” का कबूल नामा
कुछ वक़्त पहले निजी न्यूज़ चैनल ने एक स्टिंग जारी किया था इस स्टिंग में बिट्टा ने कैमरे के सामने कबूला था कि 90 के दशक में जम्मू कश्मीर में आतंकवाद अपने पैर फैला रहा था और कश्मीरी पंडितों को मार मार के भगाया जा रहा था. उस वक़्त उसने 20 कश्मीरी पंडितों की निर्मम तरीके से हत्या करी थी.

1988 में बिट्टा कराटे ने पीओके में जाकर आतंकवादद की ट्रेनिंग ली थी. ट्रेनिंग के दौरान बिट्टा के अंदर जिहाद के नाम पर आतंकवाद का ज़हर घोला गया.
बिट्टा के मनसूबे इतने खतरनाक हो गए कि वह अपने परिवार की हत्या करने के लिए भी तैयार था. इसके बाद 22 जून 1990 को श्रीनगर से बिट्टा को गिरफ्तार कर लिया गया. 16 साल जेल में रहने के बाद सबूतों के आभाव में उसे छोड़ दिया गया.

लेकिन अब स्टिंग में कबूलनामा सामने आने के साथ ही हुर्रियत नेताओं की पाकिस्तानी फंडिंग को लेकर मोदी सरकार पूरे एक्शन में आ गयी है . बिट्टा कराटे समेत बाकी सभी नेताओं को एनआईए की टीम अब दिल्ली लाकर उनसे पूछताछ करेगी.

Thursday, 25 May 2017

मंदिर की दीवार से निकला 15 लाख करोड़ का खजाना, हीरे-जवाहरात देखकर फटी रह गईं आंखें


सोने की चिड़िया के नाम से प्रसिद्ध भारत देश को यूँ तो कई विदेशी आक्रमणकारियों ने लूटा, कई तो लूट कर सोना व् अन्य कीमती सामान अपने देश ले गए पर कई लूट करने के बाद भारत में ही बस गए और लोगों को गुलाम बना कर उनपर हुकूमत करने लगे।

उस काल में भारत की समृद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज भी कई प्राचीन स्थलों में खुदाई के दौरान सोना व्र अन्य कीमती वस्तुएं मिलने के समाचार आते रहते हैं।

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक 800 साल पुराना जैन मंदिर है, जहां खुदाई के वक़्त मुगल कालीन खजाना मिलने की खबर आयी है।

इस मंदिर की दीवारें करीब-करीब 14 इंच तक मोटी हैं, खबर है कि इसी की एक दीवार को तोड़ने पर मिट्‌टी के कई घड़े मिले जिन्हें खोलने पर उनमे से हीरे मिले हैं। इनमे से कुछ घड़ों के अंदर सोना भी है।

जो 15 मजदूर यहां खुदाई का काम कर रहे थे, उन्होंने चुपचाप इसे आपस में ही बांट लिया था। मगर खज़ाना बाटने को लेकर उनमे झगड़ा हो गया और फिर ये मामला पुलिस तक जा पहुंचा। पुलिस ने जब इस दबे हुए खजाने की कुल कीमत के बारे में पता लगाया तो वो भी हैरान रह गई।

पुरे खजाने की कुल कीमत 15 लाख करोड़ के लगभग बतायी जा रही है। हालांकि ये खजाना कब का है और इस मंदिर में कहां से और कैसे आ गया, ये बात अब तक पता नहीं चल पायी है।

घटना की जानकारी मिलते ही एडीशनल एसपी कमल मौर्य घटना स्थल पर मुआयना करने पहुचे, जहां जांच करने पर सोने और चांदी के सिक्के मिले जिनपर उर्दू की इबारत और चित्र अंकित थे। पूछताछ करने पर एक स्थानीय जानकार ने कहा कि सिक्कों पर ‘शहंशाह अहमद’ अंकित है।

इंटरनेट द्वारा इस बात की प्रमाणिकता की जांच की गयी तब पता चला कि 14वीं शताब्दी के आसपास उस जगह पर शहंशाह अहमद का शासन हुआ करता था।

इतिहासकारों के मुताबिक़ ‘शेरशाह सूरी’ ने किसी जमाने में दक्षिण भारत की यात्रा करने के लिए रन्नौद से होता हुआ एक रास्ता बनवाया था। किताब ‘आईने अकबरी’ में भी शिवपुरी जिले के कोलारस, नरवर और रन्नौद का उल्लेख है। इसे देख कर ये मालूम होता है कि ये इलाके उस वक़्त कितने संपन्न हुआ करते थे।

रन्नौद, शिवपुरी जिले से करीब 60 किलोमीटर दूर कोलारस में बसा है और इसे ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इतिहासकार अरुण अपेक्षित के मुताबिक़ मोहम्मद घोरी, अलाउद्दीन खिलजी, बाबर और औरंगजेब जैसे कई मुगल आक्रमणकारियों की सेनाओं ने दक्षिण भारत पर हमले करने के दौरान यहां पड़ाव डाला था।

बाद में मुगल आक्रमणकारियों ने रन्नौद की जागीर पिंडारी भाइयों को सौंप दी थी, जो जैन धर्म के अनुयायी थे। करीब 200 वर्षों तक इस जागीर पर जैनियों का नियंत्रण रहा, तभी से उनके वंशज रन्नौद में रहते आये हैं। रन्नौद में कई बेहद प्राचीन मंदिर, मठ, मस्जिदें व् दरगाहें हैं।

Wednesday, 24 May 2017

भयंकर गर्मी के बीच सीएम योगी ने लिया ऐसा गरमा-गर्म फैसला, मुस्लिम संगठनों के छूटे पसीने !


लखनऊ : देश कोई कुछ भी कर रहा हो लेकिन मीडिया और लोगों के दिलों पर तो यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ही छाए हुए हैं. प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की जनता का कहना है कि उन्होंने योगी जैसा निडर और बेबाकी से फैसले लेने वाला सीएम पहले कभी देखा ही नहीं.

जनता की राय को सही साबित करते हुए सीएम योगी ने इस बार मुस्लिम महिलाओं के लिए ऐसा ही एक और जबरदस्त फैसला लिया है.

ट्रिपल तलाक से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को आर्थिक सहायता !

दरअसल सीएम योगी ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर पीएम मोदी और मुस्लिम महिलाओं के साथ खड़े हैं और उन्होंने फैसला लिया है कि ट्रिपल तलाक से पीड़ित सभी मुस्लिम महिलाओं को यूपी सरकार कानूनी व् अन्य सरकारी सहायता देंगी.

केवल इतना ही नहीं बल्कि ट्रिपल तलाक से पीड़ित महिलाओं को गुजर-बसर करने के लिए यूपी सरकार रानी लक्ष्मी बाई कोश से आर्थिक सहायता भी देगी.

इसे योगी सरकार का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है क्योंकि कई महिलाएं इस डर से ट्रिपल तलाक के खिलाफ अपनी राय नहीं रख रही थी कि उनका गुजर-बसर कैसे होगा. लेकिन योगी के इस फैसले के बाद मुस्लिम महिलाएं खुलकर अपनी राय सामने रख सकेंगी और इससे पीएम मोदी को ट्रिपल तलाक ख़त्म करने के अपने वादे को पूरा करने में काफी मदद मिलेगी.

मुस्लिम महिलाओं की राय जानेगी सरकार !
यही नहीं बल्कि योगी सरकार ने सभी धर्मों की महिलाओं की सहायता के लिए रानी लक्ष्मीबाई कोश खोलने का फैसला भी ले लिया है. इसके साथ ही ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले में योगी सरकार मुस्लिम महिलाओं का पक्ष रखने की तैयारी भी यूपी सरकार कर रही है.

सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम महिलाओं का साथ देने के लिए प्रदेश की सभी महिला मंत्रियों की तमाम सामाजिक संगठनों और मुस्लिम महिलाओं के साथ बैठक जारी है. 15 दिन के अंदर-अंदर इस बारे में एक रिपोर्ट तैयार हो जाएगी, जिसकी मदद से मुस्लिम महिलाओं का पक्ष सुप्रीम कोर्ट में अधिक मजबूत हो जाएगा.

सीएम योगी ने प्रदेश की मुस्लिम महिलाओं की ट्रिपल तलाक के बारे में राय जानने के लिए कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही सीएम योगी ने अनिवार्य विवाह पंजीकरण के लिये नियमावली से जुड़े जरुरी प्रस्ताव प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है.

गौरतलब है कि बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में वादा किया था कि यूपी में सरकार बनते ही वो ट्रिपल तलाक को ख़त्म करने की दिशा में तेजी से काम करेंगे, और सीएम योगी ने जिस तरह से ट्रिपल तलाक के खिलाफ हल्ला बोल दिया है उसे देखकर लगने लगा है कि अब वो दिन दूर नहीं जब समाज से ट्रिपल तलाक का सदा-सदा के लिए अंत हो जाएगा.

Tuesday, 23 May 2017

मस्सों को सिर्फ 24 घंटे में दूर करते हैं केले के छिलके!


आज के समय में लोग तरह तरह के त्वचा रोगों से घिरे हुए हैं। जिसके से एक त्वचा पर मस्सों की समस्या भी है। कुछ लोगों को गंभीर मस्से होते हैं तो कुछ लोगों को हल्के मस्से होते हैं।

मस्से त्वचा पर एक उपज की तरह होते हैं, और सुसाध्य समझे जाते हैं। यानि कि वे कैंसरयुक्त नहीं होते। इसके बावजूद इनसे ग्रसित कई लोग इन्हें निकालने के लिए आतुर रहते हैं, क्योंकि उनके अनुसार मस्से त्वचा पर अच्छे नहीं दिखते और त्वचा भद्दी और बेकार लगती है।

अपने बदन से इस दाग को हटाने के लिए लोग तरह-तरह से डॉक्टर से परामर्श लेते हैं। कई लोग मस्से हटाने के लिए आॅपरेशन और लेजर ट्रीटमेंट तक करा लेते हैं। आज हम आपको मस्से हटाने के ऐसे अचूक उपाय बता रहे हैं जिससे आपकी समस्या चुटकी बजाते ही सही हो जाएगी। आइए जानते हैं क्या हैं वो उपाय।

केले से करें मस्से दूर
केला पौष्टिक तत्वों से भरपूर फल है। केला स्वास्थ्य लाभ देने के साथ ही मस्सों को भी सफाया करता है।

केले के छिलके में ऑक्सीकरण रोधी तत्व पाए जाते हैं जो मस्सों के लिए काल साबित हुए हैं। केले के छिलके से मस्सों को हटाने के लिए अपने मस्से को केले के छिलके के साथ अच्छी तरह बांध लें। ध्यान रहें इसे इस तरह बांधें कि यह लंबे समय तक टिक सके।

करीब 24 घंटे तक मस्से को बंधा रहने दें। कुछ ही दिनों तक ऐसा करने से मस्सा हमेशा के लिए झड़ जाएगा।
सेब का सिरका भी करता छूमंतर

सेब का सिरका भी मस्सों को छूमंतर करने का एक अचूक उपाय है। बस फर्क यह है कि इससे मस्सा झड़ता नहीं है बल्कि मस्सा धीरे-धीरे जलने लगता है।

दरअसल, सेब के सिरके में मस्से के जीवाणुओं को मारने की शक्ति होती है। साथ ही सेब का सिरका मस्सों को फैलने से भी बचाता है। रोजाना कॉटन या किसी सूती कपड़े में सिरके को रखें और इसे मस्से पर लगाएं। हफ्तेभर तक ऐसा करने से ही मस्से की समस्या से छुटकारा मिलता है।
शहद का करें इस्तेमाल

चाहे बाहरी हो या आंतरिक शहद खूबसूरती बरकरार रखने का सबसे अच्छा तरीका है। त्वचा पर चमक और निखार लाने के साथ ही शहद की मदद से मस्सों से भी छुटकारा पाया जा सकता है।

मस्से पर शहद लगातर इसे डॉक्टर टेप से कवर कर दें। इसे करीब 10 से 12 घंटे तक ऐसे ही ढ़के रहने दें। लगभग 15 दिन तक ऐसा करने से काफी अच्छा रिजल्ट देखने को मिलता है।

Sunday, 21 May 2017

…और सलमान की आंखों से छलक ही गया वो दर्द जिसे उन्होंने बरसों तक छिपा रखा था !


इसमें कोई शक नहीं है कि सलमान खान बॉलीवुड इंडस्ट्री के एक टॉप स्टार हैं.

हालांकि सलमान के बारे में कहा जाता है कि वो काफी मूडी और सख्त मिजाज के इंसान हैं बावजूद इसके उन्हें एक खुशमिजाज और मस्ती करनेवाले इंसान के तौर पर भी जाना जाता है.

दरअसल सलमान खान बॉलीवुड के उन चंद सितारों में शुमार हैं जो अपनी निजी जिंदगी की समस्याओं पर बात करना ज्यादा पसंद नहीं करते हैं. लेकिन अपनी आनेवाली फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ के पहले गाने के रिलीज के दौरान सलमान की आंखों से वो दर्द छलक ही गया जिसे उन्होंने बरसों तक छुपाकर रखा था.

सलमान ने अपने दर्द को अपने फैन्स से साझा किया जिसे जानकर हर कोई भावुक हो उठा. दरअसल सलमान ने अपनी उस बीमारी के बारे में बात की जिससे वो सालों से परेशान हैं.

फेसियल डिसऑर्डर से ग्रसित हैं सलमान
अपनी ही फिल्म के एक गाने की रिलीज के मौके पर सलमान अपनी तकलीफ को अपने सीने में छिपा नहीं सके और उन्होंने खुलकर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया.

इस खास मौके पर सलमान ने बताया कि वो एक लंबे समय से भयानक दर्द देनेवाली फेसियल डिसऑर्डर नाम की बीमारी से ग्रसित हैं जिसे मेडिकल टर्म में ट्राईजेमिनल न्यूराल्जिया कहते हैं.

इस फेसियल डिसऑर्डर की वजह से सलमान को कई बार असहनीय दर्द से गुजरना पड़ता है लेकिन निराश होने के बजाय उन्हें इस बीमारी से प्रेरणा मिली है कि वो और अधिक मेहनत करें और पूरी तरह से एक्टिंग पर फोकस करें.

सलमान की मानें तो फेसियल डिसऑर्डर में चेहरे के हिस्सों को छूने से चाकू के वार जितना तेज दर्द होता है और कई बार पेनकिलर भी इस दर्द को कम नहीं कर पाते हैं.

इस फेसियल डिसऑर्डर से पीड़ित सलमान ने बताया कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस दर्द से गुजर रहे हैं. फिल्म का कोई सीन करते हुए आपके शरीर में कुछ टूट जाए, चाहे आपके घुटनों में चोट आ जाए. ऐसे में आप दर्द का बहाना नहीं बना सकते क्योंकि आपको अपने सीन में बेस्ट देना होता है और वैसे भी आपके दर्द से फैन्स को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें बस आपका बेस्ट सीन याद रहता है.

सलमान के मुताबिक इस फेशियल डिसऑर्डर से पीड़ित लोग दर्द के चलते आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी क्योंकि वो इससे लड़ना चाहते थे. इतना ही नहीं सलमान ने उन लोगों को भी हिम्मत रखने की सलाह दी जो छोटे-छोटे हादसों से अपनी जिंदगी खत्म कर लेने की सोचते हैं.

गौरतलब है कि ईद के मौके पर सलमान खान की फिल्म ट्यूबलाइट रिलीज होनेवाली है. लेकिन यहां सलमान के इस फेसियल डिसऑर्डर का दर्द और उनकी हिम्मत से उन तमाम लोगों को सीख लेने की जरूरत है जो अपनी जिंदगी की छोटी-छोटी परेशानियों के आगे घुटने टेक देते हैं.

Thursday, 18 May 2017

व्हाट्सऐप पर आए इस मैसेज को भूल कर भी ना करें क्लिक


अगर आपके किसी दोस्त ने व्हाट्सऐप पर कोई लिंक शेयर किया है जिसमें व्हाट्सऐप के नए अलग-अलग रंगों वाले वर्जन को इंस्टॉल करने की बात की गई है तो इस लिंक पर भूलकर भी क्लिक ना करें।

यह लिंक आपके कंप्यूटर, मोबाइल को बर्बाद कर सकती है। यहां तक की आपके मोबाइल में वायरस भी आ सकते हैं। लिंक कुछ इस प्रकार भेजे जा रहे हैं http://шһатѕарр.com/?colors

दरअसल रेडडिट के एक मेंबर ने व्हाट्सऐप पर शेयर हो रहे इस लिंक को लेकर दावा किया है कि यह वायरस है और इससे आपका फोन खराब हो सकता है। उन्होंने बताया कि यह लिंक व्हाट्सऐप व सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

वायरल हो रही इस लिंक पर क्लिक करने पर व्हाट्सऐप का विभिन्न रंगों वाला वर्जन डाउनलोड करने का दावा किया जाता है और जैसे ही आप इस लिंक पर क्लिक करते हैं तो यह आपको व्हाट्सऐप का नया वर्जन इंस्टॉल करने को कहता है। फिर नए वर्जन को इंस्टॉल करने से पहले आपको इस लिंक को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना का मैसेज मिलता है।

अगर आप ध्यान देंगे तो पाएंगे इस वेबसाइट पर अलग तरीके के फॉन्ट का इस्तेमाल किया गया है। इस लिंक को Cyrillic अलफाबेट में डिजाइन किया गया है। ये वेबसाइट कुछ шһатѕарр.com इस रूप में नजर आती है।

लिंक पर क्लिक करने पर कई बार यूजर्स को अलग-अलग http://blackwhats.site/ जैसे यूआरल पर रिडायरेक्ट किया जाता है। तो आपके लिए यही बेहतर है कि कलरफुल व्हाट्सऐप के टक्कर में ना पड़ें और इस प्रकार के लिंक पर क्लिक ना करें।

Wednesday, 17 May 2017

Youtube वीडियो देखकर खेत में ही बनाई लैब, 10th पास किसान आज मशरूम से कमा रहा लाखों


कुरुक्षेत्र के भौर सैयदां गांव के हरपाल सिंह बाजवा ने मशरूम उत्पादन से शुरू किए बिजनेस में एक कदम आगे बढ़ाते हुए स्पॉन मेकिंग (मशरूम का बीज तैयार करने की एक विशेष विधि, जिसमें उसे एक निश्चित तापमान पर रखा जाता है) में महारत हासिल की है।
10वीं पास किसान हरपाल ने 50 हजार से मशरूम उत्पादन शुरू किया और लाखों रुपए कमा रहे हैं। उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से स्पॉन मेकिंग के लिए एक लैब तैयार कर रखी है, जिसमें हर साल 1500 किलो स्पॉन तैयार कर रहे हैं।

किसानों के लिए हैं रोल मॉडल, आगे पढ़िए कैसे तय किया सफर...
- हरपाल सिंह बाजवा बताते हैं कि पहले वे परंपरागत खेती करते थे। वर्ष 1995 में मात्र 50 हजार रुपए से मशरूम उगाना शुरू किया। धीरे-धीरे मुनाफा हुआ तो इस तरफ ध्यान बढ़ा।

- कृषि विज्ञान केंद्र कुरुक्षेत्र और खुंब अनुसंधान निदेशालय सोलन के सहयोग से अत्याधुनिक तकनीक की जानकारी ली और अपनी जमीन पर ही मशरूम के लिए कंपोस्ट बनाना शुरू कर दिया। किसानों ने कंपोस्ट खरीदना शुरू कर दिया तो इसके लिए सोलन से बीज लाना पड़ता था।

- बीज की आवश्यकता बढ़ी तो एक अत्याधुनिक स्पॉन (मशरूम का बीज तैयार करने की एक विशेष विधि, जिसमें ) लैब लगाने का मन बनाया और अपने खेत में ही स्पॉन लैब लगा दी। इसके लिए हरियाणा सरकार के बागवानी विभाग ने सब्सिडी दी और बैंक ने लोन दिया।

- कुल 62 लाख रुपए का लोन लिया। रिश्तेदारों ने रोका कुछ ने तो मदद करने से भी इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने कदम पीछे नहीं हटाए, आज स्थिति ये है कि वे हरियाणा के प्रगतिशील किसानों में से एक है।

- वे मशरूम उत्पादन, कंपोस्ट मेकिंग और स्पॉन प्रोडक्शन से लाखों रुपए कमा रहे हैं।

जिला स्तर से लेकर मुख्यमंत्री और यूनिवर्सिटी ने कर रखा है सम्मानित
- हरपाल सिंह जिला स्तर के साथ-साथ हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला, पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से भी सम्मानित हो चुके हैं।

- इसके साथ-साथ 3 बार हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय और खुंब अनुसंधान निदेशालय सोलन ने भी उन्हें सम्मानित किया है। यू-ट्यूब से देख-देखकर विदेशी तर्ज पर बनवाई लाखों की मशीनें हजारों में
- हरपाल सिंह बाजवा बताते हैं कि उन्होंने इस क्षेत्र में अधिक से अधिक आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया है। अपने यहां कुछ मशीनों को विदेशों की तर्ज पर बनवाया है।

- उन्होंने यू-ट्यूब से मशीनें देख-देखकर लाखों रुपए की मशीनें हजारों रुपए में तैयार करवाई है। कंपोस्ट मिलाने के लिए कंपोस्ट फिलिंग मशीन, कंपोस्ट बैग भरने के लिए कंपोस्ट बैग फिलिंग मशीन अपने यहां ही तैयार कराई है।

अब 30-35 डिग्री में भी उगा सकते हैं मशरूम
- हरपाल सिंह बाजवा बताते हैं कि अमूमन मशरूम सर्दियों में उगाई जाती है, लेकिन स्पॉन मेकिंग लैब में उन्होंने अमेरिका के पेनसिलवेनिया से स्पॉन मंगाकर मशरूम का ऐसा बीज मंगाया है, जिससे अब किसान 30-35 डिग्री में भी मशरूम उगा सकते हैं। इस तकनीक का फायदा उठाने के लिए अधिक से अधिक किसान उनसे संपर्क कर रहे हैं।

ये है स्पान मेकिंग प्रोसेस
- मशरूम का बीज वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जाता है। इन बीजों को बोतल या पॉलिथिन की थैलियों में 250 या 500 ग्राम/बोतल या थैली भरते है।

- थैली के मुंह पर पहले लोहे का छल्ला लगाते हैं फिर उसमें रूई की डाट लगाते हैं। बोतल या थैली को जीवाणुविहीन करने के लिए आटोक्लेव/कुकुर में 22 पौंड दाब/वर्ग इंच पर 2 घंटे रखते है। ठंडा होने पर माध्यम में मशरूम बीज (स्पान) मिलाते हैं।

- यह कार्य जीवाणुविहीन कक्ष में किया जाता है। मशरूम फफूंद की वृद्धि इन दानों पर 15-20 दिनों में हो जाती है और फफूंद के क्वकजाल द्वारा सम्पूर्ण दाने ढक लिए जाते हैं, इसे मशरूम का बीज (मदर स्पान) कहते है। इस प्रकार तैयार बोतलों से बीज दूसरी बोतल में मिलाया जाता है तब इसे प्रथम संतति स्पान कहते हैं।